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ऐसा होता है क्या

शाम का वक्त और ठंडी - ठंडी हवा चल रही थी, झूले पर झूलती मैं बहुत खुश थी, जब भी झूला ऊंचाई की ओर जाता 5 साल का मेरा मासूम मन खुशी से इठला उठता। यह सोच कर कि मैं दुनिया में सबसे ऊंचाई पर हूं, और फिर नीचे की ओर आना और उतनी ही तेजी से ऊपर की ओर जाना। ऊपर ,नीचे करते - करते ना जाने कब मेरे पैर उस झूले से लंबे हो चले , और वह बच्चों का झूला बन कर रह गया मेरे लिए। मैं जब भी खेल कर वापस आती थी,मां कहती थी पढ़ाई करो और जब ना करती थी तो कभी-कभी माँ खाना ना देती थी।। खाना ना देना तो फिर भी चल जाता था मगर वह अक्सर गुस्से में कह उठती थी , अपनी बड़ी बहन को देखो कितने अच्छे से पढ़ती है,और तुम्हारी वह दोस्तों इस बार फर्स्ट आई है। यह शब्द ही मुझे आहत कर देते थे, मानो ऐसे जैसे मेरा झूला आसमान की ऊंचाइयों पर हो और मां के शब्द मुझे धक्क...... से जमीन पर खींच लाए, मुझे हमेशा से यह कंपेयर किये जाने पर शिकायत थी। बड़ी बहन और दोस्त पढ़ाई में अच्छे होंगे तो रहने दो वह भी तो मेरी तरह अच्छी ड्राइंग नहीं करते। माँ  ऐसा क्यों नहीं कहती  कि बड़ी बहन और दोस्त को मुझसे ड्राइंग सीखनी चाहिए। और पड़ोस वाली मासी भ...